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Showing posts from July, 2021

(Part - 7.2) #Objective Type Questions | #राग की परिभाषा | #राग के नियम | राग #यमन का शास्त्रीय परिचय | Indian Music Theory (संगीत गायन)

   🎶(संगीत गायन)🎶             Indian Music Theory Objective Type   Questions  (Part - 7.2) PART -7.2 (INDIAN MUSIC THEORY) OBJECTIVE TYPE QUESTIONS. 1. थाट की परिभाषा व इसके प्रकार। 2. 10 थाटों के स्वर  पर अलंकार। 3. राग की परिभाषा व नियम। 4. ताल दादरा का परिचय। 5. राग यमन का शास्त्रीय परिचय। उक्त परिभाषाओं से संबंधित नीचे बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर प्रस्तुत है- प्रश्न 1. एक सप्तक में कितने स्वर होते हैं। उत्तर-12 स्वर होते हैं। प्रश्न 2. थाट स्वरों का वह समूह है इससे किस की उत्पत्ति होती है। उत्तर-रागों की प्रश्न 3.संगीत के प्राचीन ग्रंथों में थाट को क्या कहते हैं उत्तर- मेल। प्रश्न 4.आजकल मेल के स्थान पर क्या शब्द प्रचलित है। उत्तर- थाट। प्रश्न 5. थाट के स्वरों में क्या उत्पन्न करने की शक्ति होनी चाहिए। उत्तर- राग। प्रश्न 6. एक थॉट में कम से कम और अधिक से अधिक कितने स्वर अनिवार्य है। उत्तर- सात स्वर अनिवार्य है। प्रश्न 7. कितने स्वरों में से सात स्वरों को चुनकर थाट बनता है। उत्तर- 12 स्वरों में से। प...

(Part - 8.2) #Objective Type Questions | #राग और #थाट में अंतर | #राग की #जातियां और #उपजातियां | #Indian Music Theory (संगीत गायन)

   🎶(संगीत गायन)🎶 Indian Music Theory Objective Type   Questions  (Part -  8.2) Part -  8.1  (Objective Type  Questions) PART -8.2 (INDIAN MUSIC THEORY) OBJECTIVE TYPE QUESTIONS. 1. मानव जीवन में संगीत का महत्व। 2. राग की परिभाषा व नियम। 3. एक ताल का परिचय 4. रागों की जातियां व उपजातियां। 5. राग और थाट में अंतर। उक्त परिभाषाओं से संबंधित नीचे बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर प्रस्तुत है- 1. व्यक्ति अपनी भावनाओं को किसके द्वारा प्रकट करता है। ‌*  किसी ना किसी कला के द्वारा। 2. मानव के हृदय की सुख-दुख की अभिव्यक्ति का सर्वोत्तम माध्यम क्या रहा है। *   संगीत। 3. कौन से काल से संगीत मानव को अनंत शांति और आनंद प्रदान करता आ रहा है। * अनादि काल से। 4. किस से संबंध जोड़ने के लिए महात्माओं और महान संतों ने संगीत का सहारा लिया। * परम ब्रह्मा से। 5. संगीत से किस की पीड़ा को हरने में अद्भुत प्रभाव दिखाया है। * ह्रदय की पीड़ा। 6. संगीत का कौन सा परिचय हमें पग-पग पर मिलता है। * अपार शक्ति का। 7. संगीत की प्रेरणा भरी  धुनों से सैनिक...

संगीत गायन भाग (6.4) #ताल, #मात्रा, #विभाग, #सम, #बोल, #ताली, #खाली, #आवर्तन इत्यादि की परिभाषाएं

   ताल, मात्रा, विभाग, सम, बोल,  ताली, खाली, आवर्तन इत्यादि की     परिभाषाएं ------------------------------------ ------------------------------------------------------------------------ ENGLISH TRANSLATE ------------------------------------ ------------------------------------------------------------------------ 5👉 Definitions of rhythm, volume, division, even, speech, clap, empty, rotation etc.     👉ताल  गाना कितना भी सुरीला क्यो न हो परंतु यदि वह ताल में न हो तो सुनने वाले को पूरा आनंद नहीं आता। वास्तव में ताल से ही गाने बजाने की शोभा बढ़ती है। ताल ही गायन वादन और नृत्य पर अंकुश रखता है।        गायन वादन और नृत्य की क्रिया में जो समय लगता है उसकी गति को मापने के पैमाने को ताल कहते हैं। ताल देने के लिए तबला, ढोलक, मृदंग आदि वाद्यों का प्रयोग किया जाता है। ------------------------------------ ------------------------------------------------------------------------ ENGLISH TRANSLATE ------------------------------------ -...

संगीत गायन भाग (7.3 ) राग यमन का शास्त्रीय परिचय | classical introductioin of Raag yaman

  👉 राग यमन का शास्त्रीय परिचय संगीत गायन भाग (7.3 ) 👉 राग यमन का शास्त्रीय परिचय   1👉राग -यमन   2.👉थाट-कल्याण   3.👉 जाति- संपूर्ण संपूर्ण   4.👉 स्वर- म॑ तीव्र शेष स्वर शुद्ध   5.👉 वादी -ग (गंधार)   6.👉संवादी - नि (निषाद)   7.👉गायन समय- रात्रि का प्रथम प्रहर   8.👉 आरोह-  सा रे ग म॑ प ध नि सां   9.👉अवरोह- ऩिरेग,म॑धनि,सां                                                        अथवा अवरोह- सांनि, धपम॑ग, रे सा।   10.👉 पकड़- पम॑गरे, ऩिरेसा      इस राग की उत्पत्ति कल्याण थाट से मानी जाती है। इसमें मध्यम म॑ स्वर् तीव्र व अन्य शेष स्वर शुद्ध लगते हैं। इस राग का वादी स्वर ग गंधार तथा संवादी नि निषाद माना जाता है। इस राग में सातों स्वरों का प्रयोग होता है। इसलिए इसकी जाति संपूर्ण संपूर्ण है। यह राग रात्रि के प्रथम प...

संगीत गायन भाग (7.2 ) राग की परिभाषा और नियम | Definition of Raag and rules of Raag

  👉राग की परिभाषा और नियम 👉 राग की परिभाषा -:       भारतीय संगीत 'राग' पर आधारित है। राग प्रधान होने के कारण ही भारतीय संगीत को 'रागदारी' संगीत भी कहा जाता है। राग अपने निश्चित समय पर गाया जाता है जिसका एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है। ऋतुओं में गाय जाने वाले बसंत, बाहर और मल्हार रागों के स्वर ह्रदय पटल (सतह) पर एक अनूठा प्रभाव छोड़ जाते हैं। रागों में ह्रदय को रंजीत करने की जो अपूर्व शक्ति निहित है उसी से हम इसे भारतीय संगीत का प्राण कहते हैं। राग हमारे संगीत की आत्मा है।    अर्थात ऐसी ध्वनि जो स्वर और वर्ण से विभूषित हो तथा मनुष्य के चित का रंजन कर सके उसे राग कहते हैं   👉 राग के नियम निम्नलिखित है-:   1. राग का सर्व प्रथम नियम यह है की इस में मधुरता और कर्ण प्रियता का होना आवश्यक है इसके अभाव में राग केवल कोलाहल मात्र ही होगा।   2. प्रत्येक राग किसी ना किसी थाट से उत्पन्न होता है प्राय उस ठाट के स्वरों की झलक हमें उस राग में अवश्य मिलती है कल्याण चार्ट सा रे गा मा पा धा नि सा स्वर समोसे बना है इससे उत्पन्न होने वाले राग यमन में भी इसकी ...

संगीत गायन भाग (8.3 ) राग की जातियां और उपजातियां | Jati and Upjati of Raag

  राग की जातियां और उपजातियां संगीत गायन भाग  (8.3 ) राग की जातियां और उपजातियां राग में लगने वाले स्वरों से राग की जाति निश्चित होती है। राग में कम से कम 5 स्वर अवश्य लगने चाहिए। इस प्रकार कुछ रागों में सात स्वरों का, कुछ में 6 स्वरों का और कुछ में 5 स्वरों का प्रयोग होता है। इस आधार पर मुख्य रूप से राग की 3 जातियां मानी गई है- 1-संपूर्ण   2-षाड़व   3-औड़व   1-संपूर्ण जब किसी राग में सातों स्वरों का प्रयोग होता है और कोई स्वर वर्जित नहीं होता तो उसे संपूर्ण जाति का राग कहते हैं। इस श्रेणी में यमन, बिलावल, भैरव आदि राग आते हैं।   2-षाड़व जिस राग में 6 स्वरों का प्रयोग होता है व एक स्वर वर्जित होता  है तो उसे षाड़व जाति का राग कहते हैं जैसे राग मारवा   3-औड़व जिस राग में 2 स्वर वर्जित करके केवल 5 स्वरों का प्रयोग होता है उसे औड़व जाति का राग कहते हैं जैसे भूपाली औड़व जाति का राग है।   👉 रागों की   उपजातियां    ऊपर राग की जातियों का जो वर्गीकरण किया गया है उसमें राग की तीन ही मुख्य जातियां बताई गई है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते ह...

संगीत गायन भाग (8. 2 ) राग और थाट में अंतर | different between Raag and Thaat

  राग और थाट में अंतर  संगीत गायन  भाग  (8. 2 ) राग और थाट में अंतर   1👉 थाट कभी गाया या बजाया नहीं जाता जबकि रागों को गाया और बजाया जाता है।   2👉 राग की उत्पत्ति किसी ना किसी थाट से होती है। जबकि थाट के स्वरों में राग उत्पन्न करने की शक्ति होना आवश्यक है।   3👉 थाट में सात स्वरों का होना अनिवार्य है। जबकि रागों में कम से कम 5 स्वर और अधिक से अधिक 7 स्वर उपयोग किए जा सकते हैं।   4👉 प्रत्येक राग और थाट की रचना सप्तक के शुद्ध तथा विकृत 12 स्वरों में से स्वर चुनकर की जाती है   5👉 थाट के यह सात स्वर क्रमानुसार होते हैं। जैसे सा रे ग म प ध नि। जबकि राग में स्वरों का क्रम में होना आवश्यक नहीं कभी-कभी रागों में स्वरों का वक्र रूप भी प्रयोग होता है।   6👉 थाट में केवल आरोह का प्रयोग किया जाता है जबकि राग में आरोह और अवरोह का प्रयोग किया जाता है।   7👉 राग में एक स्वर के दो रूप साथ साथ प्रयोग नहीं होते जबकि ठाट को गाया नहीं जाता।   8.👉 राग में मध्यम स्वर तथा पंचम स्वर एक साथ वर्जित नहीं होने चाहिए।   9.👉 राग में वादी और संवाद...