sangeet gayan (part-7.5) | राग यमन का शास्त्रीय परिचय | राग यमन का स्थाई और अंतरा अर्थात राग यमन की बंदिश
👉 राग यमन का शास्त्रीय परिचय 1👉राग -यमन 2.👉थाट-कल्याण 3.👉 जाति- संपूर्ण संपूर्ण 4.👉 स्वर- म॑ तीव्र शेष स्वर शुद्ध 5.👉 वादी -ग (गंधार) 6.👉संवादी - नि (निषाद) 7.👉गायन समय- रात्रि का प्रथम प्रहर 8.👉 आरोह- सा रे ग म॑ प ध नि सां अथवा 👉अरोह- ऩिरेग,म॑धनि,सां अवरोह- सांनि, धपम॑ग, रे सा। 10.👉 पकड़- पम॑गरे, ऩिरेसा इस राग की उत्पत्ति कल्याण थाट से मानी जाती है। इसमें मध्यम म॑ स्वर् तीव्र व अन्य शेष स्वर शुद्ध लगते हैं। इस राग का वादी स्वर ग गंधार तथा संवादी नि निषाद माना जाता है। इस राग में सातों स्वरों का प्रयोग होता है। इसलिए इसकी जाति...