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संगीत गायन भाग (8.3 ) राग की जातियां और उपजातियां | Jati and Upjati of Raag

  राग की जातियां और उपजातियां संगीत गायन भाग  (8.3 ) राग की जातियां और उपजातियां राग में लगने वाले स्वरों से राग की जाति निश्चित होती है। राग में कम से कम 5 स्वर अवश्य लगने चाहिए। इस प्रकार कुछ रागों में सात स्वरों का, कुछ में 6 स्वरों का और कुछ में 5 स्वरों का प्रयोग होता है। इस आधार पर मुख्य रूप से राग की 3 जातियां मानी गई है- 1-संपूर्ण   2-षाड़व   3-औड़व   1-संपूर्ण जब किसी राग में सातों स्वरों का प्रयोग होता है और कोई स्वर वर्जित नहीं होता तो उसे संपूर्ण जाति का राग कहते हैं। इस श्रेणी में यमन, बिलावल, भैरव आदि राग आते हैं।   2-षाड़व जिस राग में 6 स्वरों का प्रयोग होता है व एक स्वर वर्जित होता  है तो उसे षाड़व जाति का राग कहते हैं जैसे राग मारवा   3-औड़व जिस राग में 2 स्वर वर्जित करके केवल 5 स्वरों का प्रयोग होता है उसे औड़व जाति का राग कहते हैं जैसे भूपाली औड़व जाति का राग है।   👉 रागों की   उपजातियां    ऊपर राग की जातियों का जो वर्गीकरण किया गया है उसमें राग की तीन ही मुख्य जातियां बताई गई है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते ह...