भजन, शब्द और लोकगीत की परिभाषा 👉भजन ईश्वर की स्तुति प्रार्थना तथा लीला के जो पद स्वर तथा ताल में बंद करके गाए जाते हैं उन्हें भजन कहते हैं। भजन में भक्ति रस और शांत रस की प्रधानता रहती है। भजन रागों में बांधकर भी गाए जाते हैं, लेकिन उसमें राग की शुद्धता बनाए रखना आवश्यक नहीं है। भजन अधिकतर भैरवी, पिल्लू , खमाज, काफी आदि रागों में गाए जाते हैं इनके साथ कहरवा, दादरा, रूपक और तीन ताल का प्रयोग होता है ईश्वर की स्तुति प्रार्थना तथा लीला के जो पद स्वर तथा ताल में बंद करके गाए जाते हैं उन्हें भजन कहते हैं। भजन में भक्ति रस और शांत रस की प्रधानता रहती है। भजन रागों में बांधकर भी गाए जाते हैं, लेकिन उसमें राग की शुद्धता बनाए रखना आवश्यक नहीं है। भजन अधिकतर भैरवी, पिल्लू , खमाज, काफी आदि रागों में गाए जाते हैं इनके साथ कहरवा, दादरा, रूपक और तीन ताल का प्रयोग होता है 👉शब्द भी भजन की तरह ईश्वर की प्रार्थना में गाए जाने वाले वह पद हैं जिन्हें गुरु ग्रंथ साहिब में सिख गुरुओं द्वारा संकलित किया गया है। शब्द गायन की शैली भजन गायन से थोड़ी भिन्नता...
Helo Dear Friends In this blog you can learn about Indian music theory by descriptive type and objectives type basic questions.