👉 राग भूपाली का शास्त्रीय परिचय और बंदिश सिखने का आसान तरीका 1👉राग -भूपाली 2.👉थाट-कल्याण 3.👉 जाति- औड़व-औड़व 4.👉 वर्जित स्वर- म और नि स्वर 5.👉 वादी -ग (गंधार) 6.👉संवादी - ध (धैवत) 7.👉गायन समय- रात्रि का प्रथम प्रहर 8.👉 आरोह- सा रे ग,प ध, सां 9.👉अवरोह- सांध, पग, रे सा। 10.👉 पकड़- गरेसा,ध, सारेग इस राग की उत्पत्ति कल्याण थाट से मानी जाती है। इसमें म और नी स्वर वर्जित है अर्थात म और नी स्वर इस राग में प्रयोग नहीं होता। इसके आरोह अवरोह में 5-5 स्वर लगते हैं। इसलिए इस की जाति औड़व-औड़व मानी जाती है। इस राग का वादी स्वर गंधार यानी ग तथा संवादी स्वर धैवत यानी ध माना जाता है। इसे रात्रि के प्रथम प्रहर में गाया जाता है।इस राग को अधिकतर मंद्रं तथा मध्य सप्तक के स्वरों में गाया जाता है। इसमें बड़ा ख्याल, छोटा ख्याल आदि गाए जाते हैं। (इस राग की बंदिश सीखने के लिए आप Soni Music Only 4 U youtube channel) पर वीडियो देख सकते हैं। ------------------------------------ ------------------------------------------------------------------------ ENGLI...
Helo Dear Friends In this blog you can learn about Indian music theory by descriptive type and objectives type basic questions.