👉राग की परिभाषा और नियम 👉 राग की परिभाषा -: भारतीय संगीत 'राग' पर आधारित है। राग प्रधान होने के कारण ही भारतीय संगीत को 'रागदारी' संगीत भी कहा जाता है। राग अपने निश्चित समय पर गाया जाता है जिसका एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है। ऋतुओं में गाय जाने वाले बसंत, बाहर और मल्हार रागों के स्वर ह्रदय पटल (सतह) पर एक अनूठा प्रभाव छोड़ जाते हैं। रागों में ह्रदय को रंजीत करने की जो अपूर्व शक्ति निहित है उसी से हम इसे भारतीय संगीत का प्राण कहते हैं। राग हमारे संगीत की आत्मा है। अर्थात ऐसी ध्वनि जो स्वर और वर्ण से विभूषित हो तथा मनुष्य के चित का रंजन कर सके उसे राग कहते हैं 👉 राग के नियम निम्नलिखित है-: 1. राग का सर्व प्रथम नियम यह है की इस में मधुरता और कर्ण प्रियता का होना आवश्यक है इसके अभाव में राग केवल कोलाहल मात्र ही होगा। 2. प्रत्येक राग किसी ना किसी थाट से उत्पन्न होता है प्राय उस ठाट के स्वरों की झलक हमें उस राग में अवश्य मिलती है कल्याण चार्ट सा रे गा मा पा धा नि सा स्वर समोसे बना है इससे उत्पन्न होने वाले राग यमन में भी इसकी ...
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