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संगीत गायन भाग (7.2 ) राग की परिभाषा और नियम | Definition of Raag and rules of Raag

 

👉राग की परिभाषा और नियम


👉 राग की परिभाषा -:

 

    भारतीय संगीत 'राग' पर आधारित है। राग प्रधान होने के कारण ही भारतीय संगीत को 'रागदारी' संगीत भी कहा जाता है। राग अपने निश्चित समय पर गाया जाता है जिसका एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है। ऋतुओं में गाय जाने वाले बसंत, बाहर और मल्हार रागों के स्वर ह्रदय पटल (सतह) पर एक अनूठा प्रभाव छोड़ जाते हैं। रागों में ह्रदय को रंजीत करने की जो अपूर्व शक्ति निहित है उसी से हम इसे भारतीय संगीत का प्राण कहते हैं। राग हमारे संगीत की आत्मा है। 

 

अर्थात ऐसी ध्वनि जो स्वर और वर्ण से विभूषित हो तथा मनुष्य के चित का रंजन कर सके उसे राग कहते हैं

 

👉 राग के नियम निम्नलिखित है-:

 

1. राग का सर्व प्रथम नियम यह है की इस में मधुरता और कर्ण प्रियता का होना आवश्यक है इसके अभाव में राग केवल कोलाहल मात्र ही होगा।

 

2. प्रत्येक राग किसी ना किसी थाट से उत्पन्न होता है प्राय उस ठाट के स्वरों की झलक हमें उस राग में अवश्य मिलती है कल्याण चार्ट सा रे गा मा पा धा नि सा स्वर समोसे बना है इससे उत्पन्न होने वाले राग यमन में भी इसकी झलक मिलती है क्योंकि इसमें भी तीव्र मध्यम मां का प्रयोग होता है

 

3. राग में कम से कम पांच स्वर अवश्य लगने चाहिए। नियम अनुसार इससे कम स्वरों से राग का निर्माण नहीं हो सकता।

 

4. राग में अधिक से अधिक सात स्वरों का प्रयोग हो सकता है।

 

5. राग में किसी स्वर के दो रूप शुद्ध कोमल या तीव्र एक साथ लगाने का नियम नहीं है।

 

6. राग में षड्ज सा स्वर ऐसा है जो किसी भी राग में वर्जित नहीं होता इस प्रकार सा प्रत्येक राग का आधार स्वर होता है।

 

  7. किसी भी राग में म और प स्वर एक साथ वर्जित नहीं होते। यदि किसी राग में पंचम स्वर वर्जित होगा तो उसमें मध्यम स्वर का शुद्ध या तीव्र रूप में प्रयोग अवश्य किया जाएगा। यदि मध्यम स्वर वर्जित होगा तो पंचम स्वर का प्रयोग अवश्य होगा। जैसे राग भूपाली में मध्यम स्वर म वर्जित है परंतु पंचम प स्वर का प्रयोग होता है।

 

  8. राग में वादी संवादी स्वरों का होना आवश्यक है। इसके बिना राग का स्वरूप व चलन निश्चित नहीं हो सकता। वादी संवादी स्वर से ही राग का गायन वादन समय निश्चित होता है।

 

  9. राग में आरोह अवरोह का होना भी आवश्यक है।
प्रत्येक राग की रचना सप्तक के शुद्ध तथा विकृत 12 स्वरों में से स्वर चुनकर की जाती है।

 

10. प्रत्येक राग का अपना अलग सवरूप होता है उसमें यदि निश्चित स्वरों के अलावा अन्य स्वरों का प्रयोग हो जाए तो उसका स्वरूप बिगड़ जाता है



















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ENGLISH TRANSLATE

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2:Definition of Raga 
 
 
    Indian music is based on 'raga'. Indian music is also called 'Ragdari' music due to its predominance of raga. The raga is sung at its fixed time which has a psychological effect. The vowels of the spring, the outside and the Malhar ragas that are sung in the seasons leave a unique impact on the heart plane (surface). In ragas, we have called it the soul of Indian music, from which the unique power of making the heart is contained. Raga is the soul of our music. That is, a sound which is decorated with voice and color and can color the mind of a human being is called raga.
 


 Following are the rules of raga:

 
1. The first rule of the raga is that it is necessary to have sweetness and Karna dearness, in its absence, the raga will only be an uproar.

2. Every raga originates from some or the other thing, we often get a glimpse of the sound of that melody in that raga Kalyan chart sa re ga ma pa dha ni sa vowel sa ma sa are made of it, the raga emanating from it also has its glimpses in Yemen Is found because it also uses the intense middle mother.
 
3. A raga must have at least five vowels. According to the rule, raga cannot be formed with less vowels than this.
 
4. A maximum of seven vowels can be used in a raga.

5. There is no rule in raga to put two forms of a vowel pure gentle or intense together.
 
6. There is a conspicuous voice in a raga that is not forbidden in any raga, thus each raga is the base vowel.
 
  7. M and p vowel are not forbidden together in any raga. If the fifth voice is forbidden in a raga, then the middle voice will be used in a pure or intense form. If the middle vowel is forbidden, then the fifth vowel will be used. For example, in raga bhupali, medium vowel is forbidden but fifth v is used.

8. It is necessary for the raga to have the plaintiff's conversational vowels. Without it, the form and movement of the raga cannot be determined. The recitation time of the raga is fixed only by the conversational tone of the plaintiff.
 
  9. It is also necessary to have ascension in the raga.
Each raga is composed by choosing the vowels from the pure and distorted 12 vowels of the octave.
 
10. Each raga has its own distinct form, if it uses vowels other than certain vowels, then its form deteriorates. 





संगीत अध्यापक
सुनील कुमार


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