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संगीत गायन भाग (7.3 ) राग यमन का शास्त्रीय परिचय | classical introductioin of Raag yaman

  👉 राग यमन का शास्त्रीय परिचय संगीत गायन भाग (7.3 ) 👉 राग यमन का शास्त्रीय परिचय   1👉राग -यमन   2.👉थाट-कल्याण   3.👉 जाति- संपूर्ण संपूर्ण   4.👉 स्वर- म॑ तीव्र शेष स्वर शुद्ध   5.👉 वादी -ग (गंधार)   6.👉संवादी - नि (निषाद)   7.👉गायन समय- रात्रि का प्रथम प्रहर   8.👉 आरोह-  सा रे ग म॑ प ध नि सां   9.👉अवरोह- ऩिरेग,म॑धनि,सां                                                        अथवा अवरोह- सांनि, धपम॑ग, रे सा।   10.👉 पकड़- पम॑गरे, ऩिरेसा      इस राग की उत्पत्ति कल्याण थाट से मानी जाती है। इसमें मध्यम म॑ स्वर् तीव्र व अन्य शेष स्वर शुद्ध लगते हैं। इस राग का वादी स्वर ग गंधार तथा संवादी नि निषाद माना जाता है। इस राग में सातों स्वरों का प्रयोग होता है। इसलिए इसकी जाति संपूर्ण संपूर्ण है। यह राग रात्रि के प्रथम प...