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Sangeet Gayan ( Part 8.7) # Bhajan #shabdh #Lokgeet ki Paribhasha | भजन, शब्द और लोकगीत की परिभाषा

 

भजन, शब्द और लोकगीत की परिभाषा

 
👉भजन 

 

ईश्वर की स्तुति प्रार्थना तथा लीला के जो पद स्वर तथा ताल में बंद करके गाए जाते हैं उन्हें भजन कहते हैं। भजन में भक्ति रस और शांत रस की प्रधानता रहती है। भजन रागों में बांधकर भी गाए जाते हैं, लेकिन उसमें राग की शुद्धता बनाए रखना आवश्यक नहीं है। भजन अधिकतर भैरवी, पिल्लू , खमाज, काफी आदि रागों में गाए जाते हैं इनके साथ कहरवा, दादरा, रूपक और तीन ताल का प्रयोग होता है

 

ईश्वर की स्तुति प्रार्थना तथा लीला के जो पद स्वर तथा ताल में बंद करके गाए जाते हैं उन्हें भजन कहते हैं। भजन में भक्ति रस और शांत रस की प्रधानता रहती है। भजन रागों में बांधकर भी गाए जाते हैं, लेकिन उसमें राग की शुद्धता बनाए रखना आवश्यक नहीं है। भजन अधिकतर भैरवी, पिल्लू , खमाज, काफी आदि रागों में गाए जाते हैं इनके साथ कहरवा, दादरा, रूपक और तीन ताल का प्रयोग होता है

 

 

👉शब्द भी भजन की तरह ईश्वर की प्रार्थना में गाए जाने वाले वह पद हैं जिन्हें गुरु ग्रंथ साहिब में सिख गुरुओं द्वारा संकलित किया गया है। शब्द गायन की शैली भजन गायन से थोड़ी भिन्नता लिए होती है। शब्दों को भी भिन्न-भिन्न रागों में बांधकर ताल सहित गाने से भक्ति रस का संचार होता है। शब्द के साथ कहरवा, दादरा तथा रूपक आदि तालों का अधिकतर प्रयोग होता है।

 


👉लोकगीत  

 

किसी भी राज्य की प्रादेशिक ग्रामीण भाषा में गाए जाने वाले लोकगीत जिनमें वहां की सभ्यता व संस्कृति की झलक मिलती हो लोकगीत कहलाते हैं।

 

लोकगीतों में साधारण आदमी की साधारणतम भावनाओं की बड़ी स्पष्ट व सुंदर अभिव्यक्ति होती है। यह गीत हमारे जीवन के बहुत निकट होते हैं। लोकगीतों का क्षेत्र बहुत व्यापक है इसलिए इनमें ऋतु गीत जैसे फागुन और सावन के गीत, विवाह आदि संस्कारों,पनघट, कृषि तथा धार्मिक पर्वों आदि पर गाए जाने वाले गीत शामिल होते हैं।

 

       इन गीतों द्वारा हमें किसी भी समाज के रीति-रिवाजों पारिवारिक संबंधों तथा परंपराओं का ज्ञान प्राप्त होता है आजकल रेडियो व टेलीविजन के माध्यम से लोक गीतों को खूब प्रोत्साहन मिल रहा है। सिनेमा के गीतों में भी लोक धुनों का पर्याप्त मात्रा में प्रयोग किया जा रहा है

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ENGLISH TRANSLATE

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8.👉 Definition of hymns, words and folklore

 

Bhajan

 


The praises of God and the verses of the Leela which are sung closed in tone and rhythm are called hymns. Bhajan has the predominance of devotional juice and serene juice. Bhajans are also sung in ragas, but it is not necessary to maintain the purity of the raga in it. Bhajans are mostly sung in ragas like Bhairavi, Pillu, Khamaz, Kafi etc. They are used with Kaharwa, Dadra, Metaphor and three talas.

The praises of God and the verses of the Leela which are sung closed in tone and rhythm are called hymns. Bhajan has the predominance of devotional juice and serene juice. Bhajans are also sung in ragas, but it is not necessary to maintain the purity of the raga in it. Bhajans are mostly sung in ragas Bhairavi, Pillu, Khamaz, Kafi etc. They are used with Kaharwa, Dadra, Metaphor and three talas.


The words are also verses sung in prayer to God like hymns which have been compiled by the Sikh Gurus in the Guru Granth Sahib. The style of word singing differs slightly from the singing of bhajans. The words are also tied in different ragas and the songs along with the rhythm convey the devotional juice. Kaharwa, Dadra, and metaphoric rhythms are mostly used with the word.

The words are also verses sung in prayer to God like hymns which have been compiled by the Sikh Gurus in the Guru Granth Sahib. The style of word singing differs slightly from the singing of bhajans. The words are also tied in different ragas and the songs along with the rhythm convey the devotional juice. Kaharwa, Dadra, and metaphoric rhythms are mostly used with the word.

Folk songs

 


Folk songs sung in the regional rural language of any state, which reflect the civilization and culture of the state, are called folk songs.

 


In folklore, there is a very clear and beautiful expression of the simple feelings of an ordinary man. These songs are very close to our lives. The area of ​​folk songs is very wide, so it includes Ritu songs such as songs of Phagun and Saavan, songs sung on rites of marriage etc., Panaghat, agriculture and religious festivals etc.

Through these songs, we get the knowledge of the customs, family relations and traditions of any society, nowadays folk songs are getting much encouragement through radio and television. Folk tunes are also being used in adequate amounts in cinema songs.






                        संगीत अध्यापक
                            सुनील कुमार 

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