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SANGEET GAYAN (PART-8.4) खयाल की परिभाषा व प्रकार | DEFINITION OF KHYAL AND PARTS IN MUSIC

 

👉खयाल की परिभाषा व प्रकार

 

आधुनिक युग में शास्त्रीय संगीत गायन में सबसे अधिक लोकप्रिय गायन शैली ख्याल गायन है। शास्त्रीय संगीत गायन के कार्यक्रमों संगीत की महफिलों, रेडियो, दूरदर्शन पर भी मुख्य रूप से इसी गायन शैली का प्रदर्शन किया जाता है।

 

      ख्याल गायन का अविष्कार 15वीं शताब्दी में सुल्तान हुसैन शकिऀ के द्वारा हुआ माना जाता है इससे पहले धु्पद नाम की गायन शैली का ही प्रचार था।

 

    किसी भी राग के नियमों का पालन करते हुए जब गायक शब्दों में स्वरों को अपनी कल्पना और कला कौशल से भिन्न भिन्न प्रकार के अलावा व तानों से सजाकर राग प्रस्तुत करता है तो उसे ख्याल गायन कहते हैं।

 

  ख्याल गायन दो प्रकार के हैं

 

👉बड़ा ख्याल
👉छोटा ख्याल

 

बड़ा ख्याल बड़ा ख्याल विलंबित लय में गाया जाता है। इसके दो भाग स्थाई और अंतरा होते हैं। संगीत सम्मेलनों में कलाकार पहले बड़ा ख्याल भी गाता है। इसकी प्रकृति गंभीर होने के कारण श्रोताओं पर इस गायन का विशेष प्रभाव पड़ता है। गायक अपनी कला का सर्वाधिक प्रदर्शन इस गायन द्वारा कर सकता है। गायक बड़े ख्याल से पूर्व थोड़ा आलाप करते हैं तथा स्थाई अंतरा गाने के बाद राग के स्वरों का विस्तार करते हुए अलाप,बोल आलाप, बहलावे आदि लेते हैं। तानों, बोलतानों तथा सरगम आदि द्वारा गायक राग के सौंदर्य में वृद्धि करते हुए अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।
  
     बड़े ख्याल को एक ताल,आड़ा चौताल, तिलवाड़ा तथा झुमरा आदि तालों में गाया जाता है। इस ख्याल के बोलों में अधिकतर शांत,करूण तथा श्रृंगार रस की प्रधानता रहती है।

 

    खयाल गायकी में अदारंग,सदारंग, मनरंग और हररंग का नाम विशेष रूप से प्रसिद्ध है। 18 वीं शताब्दी में मोहम्मद शाह रंगीला के दरबारी गायक अदारंग और सदारंग ने हजारों खयालों की रचना की थी। आज भी इन द्वारा रचित खयालों को बड़े शौक से गाया जाता है।

 

छोटा ख्याल छोटा ख्याल मध्य अथवा द्रुत लय में गाया जाता है। इसके भी दो भाग स्थाई अंतरा होते हैं। बड़े ख्याल की तरह इसमें भी आलाप, बोलालाप, ताने,बोल तानें आदि ली जाती है। गायक लोग अधिकतर एक ही राग में पहले बड़ा ख्याल और बाद में छोटा ख्याल गाते हैं। बड़े खयाल व छोटे खयाल की बंदिश अर्थात कविता के बोल अलग-अलग होते हैं। गायक स्वतंत्र रूप से भी छोटा ख्याल गाते हैं। बड़े ख्याल गायन में समय काफी लगता है, जबकि छोटा ख्याल मध्य लय में और कम समय में गाया जाता है। छोटा खयाल तीन ताल, एक ताल, झप ताल तथा रूपक आदि तालों में गाया जाता है।

 

   कहते हैं छोटे खयाल का आविष्कार अमीर खुसरों ने 14वीं शताब्दी में किया था। आज खयाल गायकी अपनी सरसता और कलात्मकता के कारण दिन प्रतिदिन लोकप्रिय होती जा रही है।


 


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ENGLISH TRANSLATE

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4- Kaharwa tal





5👉 Definition and types of food

 


In the modern era, the most popular singing style in classical music singing is khyal singing. This singing style is also mainly performed on classical music singing programs, musical galleries, radio, Doordarshan.


Khyal singing was invented in the 15th century by Sultan Hussain Shakir, before that Dhupad's style of singing was promoted.

 


    When following the rules of any raga, when the singer presents the raga in words in different ways other than his imagination and art skills and adorns it with tones, it is called khyal singing.

 


  There are two types of singing

 


Big care

Little care


Bada Khyal Bada Khyal is sung in a delayed rhythm. Its two parts are permanent and interstitial. In music conventions, the artist also sings firstly. This singing has a special effect on the audience due to its serious nature. Singer of his art


The most performance one can do is by singing. The singers carefully do a little bit of alaap and after a permanent antara, they take alaap, bola alaap, bahalave etc., expanding the raga's vocals. Singers perform their art while enhancing the beauty of raga by tans, boltans and sargam etc.


The big Khayal is sung in a rhythm, aada chautal, tilwara and jhumra etc. Most of the words of this thought remain calm, compassionate and make-up juice.

 


    The names of Adarang, Sadarang, Manarang and Harang are particularly famous in Khayal singing. In the 18th century, courtesans of Mohammad Shah Rangeela, Adarang and Sadarang composed thousands of ideas. Even today the thoughts composed by him are sung with great passion.


Chhota Khyal Chhota Khyal is sung in the middle or rapid rhythm. It also has two permanent halves. Like a big thought, alaap, bolalap, taunt, speech, etc. are also taken in it. Singers sing mostly Bada Khyal and later Chhota Khyal in the same raga. Big Khayal and small Khayal's bandish means that the lyrics of the poem are different. Singers also sing Chhota Khyal independently. It takes a lot of time to sing very carefully,While Chhota Khyal is sung in the middle rhythm and in short time. Chhota Khayal is sung in three talas, one tal, jhap tal and metaphor etc.It is said that Chhot Khayal was invented by Amir Khusra in the 14th century. Today Khayal singing is becoming popular day by day due to its plausibility and artistry.













संगीत अध्यापक
सुनील कुमार


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