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SANGEET GAYAN (PART 6.1) LEARN INDIAN MUSIC THEORY, DEFINATION OF MUSIC AND PARTS,SWAR (TONE), PARTS OF SWAR

 

🎶(संगीत गायन)🎶

 

1👉    संगीत की परिभाषा व अंग।

 

2👉    स्वर की परिभाषा और स्वर के प्रकार।

 

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1👉संगीत की परिभाषा व अंग।  

 

वैसे तो कलाएं अनेक हैं लेकिन काव्य कला, मूर्तिकला, वास्तु कला, चित्रकला और संगीत कला यह पांच ललित कलाएं हैं। इन सभी कलाओं में संगीत को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

 

संगीत ऐसी कला है जिसका आनंद मनुष्य सुनने मात्र से प्राप्त कर लेता है। इसकी मधुर ध्वनि युवा, वृद्ध और बच्चों, सभी को अपनी और आकर्षित करती है, हर्ष और उल्लास से परिपूर्ण करती है।

 

            मानव अपने मन के भावों को प्रकट करने के लिए हमेशा किसी ना किसी कला का प्रयोग,सहारा लेता आया है। चित्रकार अपने भाव रंगो और रेखाओं के माध्यम से, कवि शब्दों के द्वारा और संगीतकार स्वर और लय के द्वारा इन्हें प्रकट करता है।

 

       संगीत में गायन, वादन और नृत्य अर्थात गाना, बजाना और नाचना तीनों कलाओं का समावेश है इस प्रकार गायन, वादन और नृत्य तीनों कलाओं के सम्मिलित रूप को हम 'संगीत' कहते हैं।

 

  वैसे तो गायन वादन और नृत्य तीनों कलाएं स्वतंत्र है लेकिन फिर भी तीनों कलाएं एक दूसरे पर किसी ना किसी रूप में आश्रित हैं। गायन का वादन से तथा नृत्य का वादन और गायन से गहरा संबंध है। तीनों ही कलाएं एक दूसरे को निखारने और सवारने में सहायक होती है।

 

👉संगीत के अंग-:

 

संगीत के तीन अंग गायन, वादन और नृत्य की परिभाषा निम्न प्रकार से है-

 

1. गायन

 

जब हम शब्द, स्वर और ताल के माध्यम से अपने मन के भावों को प्रकट करते हैं तो उसे गायन कहते हैं। गीत, भजन, शब्द, खयाल, ठुमरी आदि इसके मुख्य प्रकार हैं।


 

                                            

2. वादन-:

 

जब स्वर लय और ताल के साथ किसी वाद्य (सितार, बांसुरी, वायलेंस तबला) को बजाया जाता है और संगीतकार अपने भावों को उनकी सहायता से व्यक्त करता है तो उसे वादन कहते हैं।



👉 नृत्य-:

 

इसमें नर्तक भिन्न भिन्न प्रकार की भाव मुद्राओं तथा अंग संचालन द्वारा अपने मन के भावों को अभिव्यक्त करता है। साधारण मनुष्य भी कई बार खुशी के अवसर पर नृत्य दोबारा अपनी प्रसंता प्रकट करने लगता है।

 


 

2👉    स्वर की परिभाषा और स्वर के प्रकार।

 

2👉स्वर की परिभाषा


 

संगीत सुर अर्थात स्वर का ही खेल है। यह स्वरों की मधुर आवाजें है जो हमें आकर्षित करती है तथा जिन्हें सुनकर हम आनंदित होकर झूमने लगते हैं अतः स्वर ही संगीत का प्राण है। स्वर के बिना संगीत का कोई अस्तित्व नहीं है। इस स्वर का आधार ध्वनि है। लेकिन प्रत्येक ध्वनि का संगीत में प्रयोग नहीं हो सकता। अतः स्वर की परिभाषा निम्न प्रकार से की जा सकती है-:


 

        'संगीत में प्रयोग होने वाली वह निश्चित ध्वनि जो सुनने में मधुर हो उसे स्वर कहते हैं।


 

       भारतीय संगीत में प्रयोग होने वाली यह निश्चित और मधुर ध्वनियां मुख्य रूप से सात मानी गई है। इन्हें संगीत के 7 स्वर भी कहते हैं।


 

इनके नाम निम्न प्रकार से हैं-


 

1. षड्ज (सा)
2. ऋषभ (रे)
3. गंधार (ग)
4. मध्यम (म)
5. पंचम (प)
6. धैवत (ध)
7. निषाद(नि)


स्वर के प्रकार-:


 

स्वरों के मुख्य रूप से तीन प्रकार माने गए हैं-


 

1. शुद्ध स्वर
2. कोमल स्वर
3. तीव्र स्वर

 
👉1. शुद्ध स्वर

 

जब स्वर अपने निश्चित स्थान पर गाए बजाएं जाते हैं तो उन्हें शुद्ध स्वर कहते हैं जैसे सा,रे,ग,म,प,ध,नि इस रूप में शुद्ध स्वर कहलाते हैं। इन सातों स्वरों में सा और प ऐसे स्वर हैं जो कभी भी अपने स्थान से नहीं हटते। इसलिए इन्हें अचल स्वर भी कहते हैं।


 
👉कोमल स्वर

 

कोमल स्वर वे स्वर होते हैं जो आपने निश्चित स्थान से कुछ नीचे उतर कर गाय बजाए जाते हैं। सात स्वरों में चार स्वर रे॒,ग॒,ध॒,नि॒ ऐसे हैं जो आवश्यकता अनुसार कोमल हो जाते हैं। कोमल स्वर को दिखाने के लिए स्वर के नीचे _लेटी रेखा लगा दी जाती है। जैसे कि-रे॒,ग॒,ध॒,नि॒


 
👉तीव्र स्वर

 

जब स्वर अपने निश्चित स्थान से थोड़ा ऊंचा गाया बजाया जाता है तो उसे तीव्र स्वर कहते हैं। सातों स्वरों में केवल 'म' ही ऐसा स्वर है जो तीव्र होता है तीव्र स्वर को दिखाने के लिए स्वर पर खड़ी रेखा (l) लगाई जाती है जैसे कि- म॑ स्वर पर लगाई गई है।


 

कोमल और तीव्र स्वरों को चल स्वर या विकृत स्वर भी कहते हैं।


 इस प्रकार संगीत में सात शुद्ध, चार कोमल और एक तीव्र स्वर अर्थात कुल मिलाकर 12 स्वर होते हैं जैसे की निम्नलिखित है-

सा रे॒ रे ग॒ ग म म॑ प ध॒ ध नि॒ नि


LEARN INDIAN MUSIC THEORY BY WATCH BELOW VIDEO 




 













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ENGLISH TRANSLATE

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(Music Vocal (Singing)


 

1     Definition and part of music.


2.    Definition of vowel and vowel Type.



1 Definition and part of music.

 
    Although the arts are many, but the five fine arts are poetic art, sculpture, architectural art, painting and music art. Music is considered to be the best among all these arts.
 
Music is such an art whose pleasure a person achieves by just listening. Its melodious sound attracts young, old and children, all of them, full of joy and gaiety.

Human has always resorted to using some art to express his feelings of mind. The painter manifests them through his expressions and lines, by the poet's words, and by the composer's tone and rhythm.
 
       Music consists of singing, playing and dancing ie singing, playing and dancing are the three arts, thus singing, playing and dancing are the combined forms of the three arts we call 'sangeet'.

Although singing and dancing are independent three arts, but still all three arts are dependent on each other in one way or the other. Singing is closely related to playing and dance is closely related to playing and singing. All the three arts are helpful in improving and riding each other.



Parts of music:

 

The three parts of music: Singing, playing and dancing are defined as follows.
 
1. Singing-
 
       When we express our expressions of mind through words, vowels and rhythms, it is called singing. Songs, hymns, words, Khayal, Thumri etc. are its main types.


2. Recital:
 
         When an instrument (sitar, flute, violance tabla) is played with melody and rhythm, and the composer expresses his expressions with his help, it is called playing.




3.👉 Dance-:
 
 In this, the dancer expresses the mood of his mind through different types of gestures and movement of the organ. Even ordinary people, on the occasion of happiness, dances again to express their process.


Definition of Swar (indian music sound)

 

    Music is the play of sound. It is the melodious sounds of the vowels that attract us, and on hearing which we start to rejoice and hence the voice is the soul of music. Music has no existence without vowels. The basis of this vowel is sound. But not every sound can be used in music. Hence the definition of vowel can be defined as follows:


 
        The fixed sound used in music which is pleasant to listen to is called swara.
These definite and melodious sounds used in Indian music are mainly considered to be seven. They are also called 7 notes of music.


 
Their names are as follows:
 
1. Shadaj  (Sa)


2. Rishabh (Re)


3. Gandhar (Ga)


4. Medium (Madhyam) (Ma)


5. Puncham (Pa)


6. Dhevat (Dha)


7. Nishad (Ni)



Type of Vowel:



There are mainly three types of vowels -
 
1. Pure Voice


2. soft tone


3. Sharp tone
 
.1. Pure voice
 
When the vowels are sung at their fixed place they are called pure vowels like sa, re, c, m, p, dh, ni in this form are called pure vowels. Among these seven vowels, Sa and P are vowels that never move away from their place. Therefore, they are also called fixed voices.


2.    Soft voice

 
Gentle voices are those sounds that you get down from a certain place and are played by a cow. The four vowels in seven vowels are ray, ga, dha, ni, which become soft as per the requirement. The _late line is placed below the vowel to show the soft tone. Such as -Re, Ga, Dha, Ni


3.    Fast voice
 
When a vowel is sung a little higher than its fixed position, it is called a loud sound. Of all the seven vowels, 'M' is the only one which is loud. A vertical line (l) is placed on the vowel to show the sharp vowel as if - m is applied on the vowel.
 
Soft and intense vowels are also called movable vowels or distorted vowels.

 Thus the music consists of seven pure, four soft and one intense tone i.e. 12 vowels in total, as follows:

sa re re ga ga ma ma pa dha dh ni ni

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संगीत अध्यापक
सुनील कुमार


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