थाट की परिभाषा-:
थाट का अर्थ है ढांचा। जिस प्रकार झोपड़ी बनाने के लिए पहले ढांचा तैयार किया जाता है उसी प्रकार वाद्य के दंड पर पर्दे बांधकर उन्हें सरकाकर, राग के लिए जो स्वरूप बनाया जाता है उसे थाट कहते हैं। थाट शब्द का उपयोग तंत्री वाद्यों के लिए है एक सप्तक में शुद्ध, कोमल और तीव्र कुल मिलाकर 12 स्वर होते हैं। सप्तक के इन स्वरों से थाटों का निqर्माण होता है। 'थाट स्वरों का वह समूह है जिससे राग की उत्पत्ति होती है।'संगीत के प्राचीन ग्रंथों (मध्यकाल में)में थाट को मेल भी कहते हैं। आजकल थाट शब्द ही प्रचलित है। इसी मेल के पर्यायवाची रूप में उत्तर भारत में संस्थान शब्द था। अतः मेल, थाट, संस्थान यह एक ही है। थाट का अर्थ है ऐसी जगह जहां राग एकत्रित होकर वर्गीकृत होते हैं। उत्तर भारतीय संगीत में थाटों की संख्या समय-समय पर घटती बढ़ती रही। परंतु पंडित विष्णु नारायण भातखंडे जी ने ठाठ पद्धति को व्यवस्थित किया तथा 32 थाटों को गणित द्वारा प्रकाशित किया। 32 थाटों में से 10 थाट ही मुख्य माने।इन्हीं 10 थाटों से अनेक राग उत्पन्न होते हैं। इसलिए थाट को 'जनक' यानी 'पिता'की उपाधि दी जाती है। एक थाट से लगभग 484 राग उत्पन्न हो सकते हैं। राग थाट पर पूरी तरह से आश्रित होता है। थाट की पहचान के लिए उससे उत्पन्न होने वाले किसी प्रमुख राग का ही नाम उसे दे दिया जाता है जैसे भैरव थाट से उत्पन्न होने वाले उसके प्रसिद्ध राग का नाम भैरव ही होता है।
यह 10 थाट तथा उनके स्वर
निम्नलिखित है-:
1. बिलावल (सभी स्वर शुद्ध होंगे) सा रे ग म प ध नि।
2. कल्याण थाट (म॑ तीव्र स्वर शेष सभी स्वर शुद्ध होंगे) सा रे ग म॑ प ध नि।
3. खमाज थाट (नि॒ कोमल स्वर शेष सभी स्वर शुद्ध होंगे) सा रे ग म प ध नि॒।
4. काफी थाट (ग॒,नि॒ कोमल स्वर शेष सभी स्वर शुद्ध होंगे) सा रे ग॒ म प ध नि॒।
5. आसावरी थाट (ग॒,ध॒,नि॒ स्वर कोमल शेष सभी स्वर शुद्ध होंगे) सा रे ग॒ म प ध॒ नि॒।
6. भैरवी थाट (रे॒, ग॒, ध॒,नि कोमल स्वर शेष सभी स्वर शुद्ध होंगे) सा रे॒ ग॒ म प ध॒ नि॒।
7. भैरव थाट (रे॒, ध॒ कोमल स्वर शेष सभी स्वर शुद्ध होंगे) सा रे॒ ग म प ध॒ नि।
8. मारवा थाट (रे॒ कोमल, म॑ तीव्र स्वर शेष सभी स्वर शुद्ध होंगे) सा रे॒ ग म॑ प ध नि।
9. पूर्वी थाट (रे॒,ध॒ कोमल स्वर, म॑ तीव्र स्वर शेष सभी स्वर शुद्ध होंगे) सा रे॒ ग म॑ प ध॒ नि।
10. तोड़ी थाट (रे॒,ग॒,ध॒ कोमल,म॑ तीव्र स्वर शेष सभी स्वर शुद्ध होंगे) सा रे॒ ग॒ म॑ प ध॒ नि।
Music Teacher
Sunil Kumar Soni
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