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Showing posts from September, 2021

Sangeet Gayan ( Part-8.8) राग भैरव का स्थाई और अंतरा

   राग भैरव का स्थाई और अंतरा राग भैरव का  अलाप व तानें

Sangeet Gayan (Part -7.7) Definition of Vadi Swar and Swandi Swar

  वादी की परिभाषा  -  किसी भी राग में सबसे अधिक लगने वाले स्वर को वादी स्वर कहते हैं अर्थात किसी भी राग में जिस स्वर पर अधिक रुका या ठहराव किया जाता है वह उस राग का वादी स्वर कहलाता है। वादी स्वर को राग रूपी राज्य में राजा की संज्ञा दी गई है। वादी स्वर एक ही होता है। प्रत्येक राग का अपना-अपना वादी स्वर होता है। 👉 संवादी स्वर की परिभाषा- किसी भी राग में वादी स्वर से कम तथा अन्य स्वर से अधिक रुका या ठहराव किया जाए उस स्वर को संवादी स्वर कहते हैं। राज रूपी राज्य में संवादी स्वर को मंत्री की संज्ञा दी गई है। किसी भी राग में संवादी स्वर भी एक ही होता है। किसी भी राग का स्वरूप जानने के लिए वादी और संवादी स्वर की विशेष भूमिका रहती  है। ------------------------------------ ------------------------------------------------------------------------ ENGLISH TRANSLATE ------------------------------------ ------------------------------------------------------------------------ Definition of 👉vāadī -  The highest sound in any raga is called the vadi vowra, that is, the tone w...

Sangeet Gayan ( part - 7.6 ) #Raag Vilawal ka shastriya prichya | #राग विलावल का शास्त्रीय परिचय

   राग विलावल का शास्त्रीय परिचय उत्तर  थाट -  विलावल         जाति-  संपूर्ण संपूर्ण         वादी- ध (धैवत)          संवादी-  ग (गंधार)       गायन समय-  दिन का प्रथम प्रहर      आरोह - सा रे ग म प ध नि सां अवरोह-  सां नि ध प म ग ये सा पकड़-  ग प म ग म ये सा। ------------------------------------ ------------------------------------------------------------------------ ENGLISH TRANSLATE ------------------------------------ ------------------------------------------------------------------------ Question 2. Classical introduction of raga vilaval North Thaat - Villaval         Caste - Total Complete         Plaintiff          Conversational-c (Gandhar)       Singing time - first stroke of the day      A...

Sangeet Gayan ( Part 8.7) # Bhajan #shabdh #Lokgeet ki Paribhasha | भजन, शब्द और लोकगीत की परिभाषा

  भजन, शब्द और लोकगीत की परिभाषा   👉भजन    ईश्वर की स्तुति प्रार्थना तथा लीला के जो पद स्वर तथा ताल में बंद करके गाए जाते हैं उन्हें भजन कहते हैं। भजन में भक्ति रस और शांत रस की प्रधानता रहती है। भजन रागों में बांधकर भी गाए जाते हैं, लेकिन उसमें राग की शुद्धता बनाए रखना आवश्यक नहीं है। भजन अधिकतर भैरवी, पिल्लू , खमाज, काफी आदि रागों में गाए जाते हैं इनके साथ कहरवा, दादरा, रूपक और तीन ताल का प्रयोग होता है   ईश्वर की स्तुति प्रार्थना तथा लीला के जो पद स्वर तथा ताल में बंद करके गाए जाते हैं उन्हें भजन कहते हैं। भजन में भक्ति रस और शांत रस की प्रधानता रहती है। भजन रागों में बांधकर भी गाए जाते हैं, लेकिन उसमें राग की शुद्धता बनाए रखना आवश्यक नहीं है। भजन अधिकतर भैरवी, पिल्लू , खमाज, काफी आदि रागों में गाए जाते हैं इनके साथ कहरवा, दादरा, रूपक और तीन ताल का प्रयोग होता है     👉शब्द  भी भजन की तरह ईश्वर की प्रार्थना में गाए जाने वाले वह पद हैं जिन्हें गुरु ग्रंथ साहिब में सिख गुरुओं द्वारा संकलित किया गया है। शब्द गायन की शैली भजन गायन से थोड़ी भिन्नता...